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Showing posts with the label 8. सीमावर्ती राजवंशो का अभ्युदय

पाल वंश

पाल वंश पाल वंश का संस्थापक गोपाल 750 ईसवी था। इस वंश की राजधानी मुंगेर थी। गोपाल बौद्ध धर्म का अनुयाई था इसने ओदंतपुरी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। पाल वंश का सबसे महान शासक धर्मपाल था जिसने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। ओदंतपुरी (बिहार) के प्रसिद्ध बौद्ध मठ का निर्माण देवपाल ने कराया था। गौड़ी रीति नामक साहित्यिक विद्या का विकास पाल शासकों के समय में हुआ।

कश्मीर के राजवंश

कश्मीर के राजवंश कश्मीर पर शासन करने वाले शासक वंश काल क्रम में इस प्रकार थे- कार्कोट वंश>उत्पल वंश>लोहार वंश। सातवीं शताब्दी में दुर्लभ वर्धन नामक व्यक्ति ने कश्मीर में कार्कोट वंश की स्थापना की थी। प्रतापपुर नगर की स्थापना दुर्लभक ने की थी। कार्कोट वंश का सबसे शक्तिशाली राजा ललितादत्य मुक्तापीड था। कश्मीर का मार्तंड मंदिर का निर्माण ललितादित्य के द्वारा करवाया गया था। कार्कोट वंश के बाद कश्मीर पर उत्पल वंश का शासन हुआ इस वंश का संस्थापक अवंति वर्मन था। अवंतीपुर नामक नगर की स्थापना अवंति वर्मन ने की थी। उत्पल वंश के बाद कश्मीर पर लोहार वंश का शासन हुआ। लोहार वंश का संस्थापक संग्राम राज था। लोहार वंश का शासक हर्ष- विद्वान, कवि तथा कई भाषाओं का ज्ञाता था। कल्हण हर्ष का आश्रित कवि था। जयसिंह, लोहार वंश का अंतिम शासक था जिसने 1128 ईस्वी से 1155 ईस्वी तक शासन किया। जय सिंह के शासन के साथ ही कल्हण की राजतरंगिणी का विवरण समाप्त हो जाता है। राजतरंगिणी - भारत की पहली इतिहास की पुस्तक है।

कामरूप का वर्मन वंश

कामरूप का वर्मन वंश चौथी शताब्दी के मध्य काम रूप में वर्मन वंश का उदय हुआ इस वंश की प्रतिष्ठा का संस्थापक पुष्य वर्मन था। इसकी राजधानी प्रयाग ज्योतिष नामक स्थान पर थी। कालांतर में कामरुप पाल साम्राज्य का एक अंग बन गया।

सेन वंश

सेन वंश सेन वंश की स्थापना सामंत सेन ने राढ़ में की थी। इसकी राजधानी नदिया लखनौती थी। सेन वंश के प्रमुख शासक विजय सेन, बल्लाल सेन एवम लक्ष्मण सेन थे। सेन वंश का प्रथम स्वतंत्र शासक विजयसेन था, जो शैव धर्म का अनुयाई था। दान सागर एवं अद्भुत सागर नामक ग्रंथ की रचना सेन शासक बल्लाल सेन ने की थी। लक्ष्मण सेन की राज्यसभा में गीत गोविंद के लेखक जय देव, पवनदूत के लेखक धोई एवं ब्राह्मण सर्वस्य के लेखक हलायुध रहते थे। हलायुद्ध लक्ष्मण सेन का प्रधान न्यायाधीश एवं मुख्यमंत्री था। सेन राजवंश प्रथम राजवंश था जिसने अपना अभिलेख सर्वप्रथम हिंदी में उत्कीर्ण करवाया। विजय सिंह ने देव पाड़ा में प्रद्युम्नेश्वर मंदिर (शिव की विशाल मंदिर) की स्थापना की। लक्ष्मण सेन बंगाल का अंतिम हिंदू शासक था।