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Showing posts with the label 9. राजपूत राजवंशो की उत्त्पत्ति

गुर्जर प्रतिहार वंश

राजपूत राजवंशो की उत्त्पत्ति गुर्जर प्रतिहार वंश इस वंश का संस्थापक नागभट्ट प्रथम था। नागभट्ट प्रथम मालवा का शासक था। नागभट्ट द्वितीय को राष्ट्रकूट वंश के सम्राट गोविंद तृतीय ने हराया था। प्रतिहार वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली एवं प्रतापी राजा मिहिरभोज था। मिहिर भज ने अपनी राजधानी क़न्नौज में बनाई थी वह विष्णु भक्त था उसने विष्णु के सम्मान मैं आदि वाराह की उपाधि ग्रहण की। राजशेखर प्रतिहार शासक महेंद्र पाल के दरबार में रहते थे। इस वंश का अंतिम राजा यशपाल (1036 ईस्वी) था। दिल्ली नगर की स्थापना तोमर नरेश अनंग पाल ने ग्यारहवीं सदी के मध्य में की।

गहड़वाल (राठौड़) राजवंश

गहड़वाल (राठौड़) राजवंश गहड़वाल वंश का संस्थापक चंद्रदेव था इसकी राजधानी वाराणसी काशी थी। किस वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा गोविंदचंद्र था। गोविंद चंद्र का मंत्री लक्ष्मीधर शास्त्रों का प्रखंड पंडित था जिसने कृत्यकल्पतरु नामक ग्रंथ लिखा था। पृथ्वीराज तृतीय ने स्वयंवर से जयचंद की पुत्री संयोगिता का अपहरण कर लिया था। इस वंश का अंतिम शासक जयचंद था । जिसे गौरी ने 1194 ईस्वी के चंदावर युद्ध में मार डाला।

चाहमान या चौहान वंश

चाहमान या चौहान वंश चौहान वंश का संस्थापक वासुदेव था इस वर्ष की प्रारंभिक राजधानी अहिच्छत्र थी बाद में अजयराज द्वितीय ने अजमेर नगर की स्थापना की ओर उसे राजधानी बनाया। इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक अर्णोराज के पुत्र विग्रहराज चतुर्थ विसलदेव 1153 से 1163 ईस्वी हुआ। हरिकेली नामक संस्कृत नाटक के रचयिता विग्रहराज चतुर्थ था। सोमदेव, विग्रहराज चतुर्थ के राजकवि थे उन्होंने ललित विग्रहराज नामक नाटक लिखा।  अड़ाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद शुरू में विग्रहराज चतुर्थ द्वारा निर्मित एक विद्यालय था। पृथ्वीराज तृतीय इस वंश का अंतिम शासक था। चंदवरदाई पृथ्वीराज तृतीय का राजकवि था, जिसकी रचना पृथ्वीराज रासो है। रणथंभौर के जैन मंदिर का शिखर पृथ्वीराज तृतीय ने बनवाया था। तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ जिसमें पृथ्वीराज तृतीय की विजय एवं मोहम्मद गौरी की हार हुई। तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में हुआ जिसमें मोहम्मद गौरी की विजय एवं पृथ्वीराज तृतीय की हार हुई।

परमार वंश

परमार वंश परमार वंश का संस्थापक उपेंद्रराज था। इसकी राजधानी धारा नगरी थी । (प्राचीन राजधानी उज्जैन) परमार वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक राजा भोज था। राजा भोज ने भोपाल के दक्षिण में भोजपुर नामक झील का निर्माण करवाया। नैषधीयचरित के रचनाकार श्रीहर्ष थे। नवसाहसाड्ंग चरित्र के रचयिता पद्मगुप्त, दशरूपक के रचयिता धनंजय, धनिक, हलायुध एवं अमितगति जैसे विद्वान वाक्यपति मुंज के दरबार में रहते थे। कविराज की उपाधि से विभूषित शासक था- राजा भोज। भोज ने अपनी राजधानी में सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया था। भोजने चित्तौड़ में त्रिभुवन नारायण मंदिर का निर्माण करवाया था। परमार वंश के बाद तोमर वंश का उसके बाद चाहमान वंश का और अंततः 1297 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नसरत खां और उलूग खां ने मालवा पर अधिकार कर लिया।

चंदेल वंश

चंदेल वंश प्रतिहार साम्राज्य के पतन के बाद बुंदेलखंड की भूमि पर चंदेल वंश का स्वतंत्र राजनीतिक इतिहास प्रारंभ हुआ। बुंदेलखंड का प्राचीन नाम जेजाकभुक्ति है। चंदेल वंश का संस्थापक नन्नुक था।(831ई०) इसकी राजधानी खजुराहो थी प्रारंभ में इसकी राजधानी (कलिंजर) महोबा थी। चंदेल वंश का प्रथम स्वतंत्र एवं सबसे प्रतापी राजा यशोवर्मन था। यशोवर्मन ने कन्नौज पर आक्रमण कर प्रतिहार राजा देवपाल को हराया तथा उससे एक विष्णु की प्रतिमा प्राप्त कि, जिससे उसने खजुराहो के विष्णु मंदिर में स्थापित की। धंग ने जिन्नात विश्वनाथ एवं वैद्यनाथ मंदिर का निर्माण करवाया। चंदेल शासक विद्याधर ने कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल की हत्या कर दी क्योंकि उसने महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का सामना किए बिना ही आत्मसमर्पण कर दिया था। विद्याधर ही अकेला ऐसा भारतीय नरेश था जिसने महमूद गजनी की महत्वकांक्षाओं का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। चंदेल शासक कीर्ति वर्मन की राज्यसभा में रहने वाले कृष्ण मिश्र ने प्रबोध चंद्रोदय की रचना की थी। कीर्ति वर्मन ने महोबा के समीप कीर्ति सागर नामक जलाशय का निर्माण किया। आल्हा- उदल नामक दो से...

सोलंकी वंश अथवा गुजरात के चालुक्य शासक

सोलंकी वंश अथवा गुजरात के चालुक्य शासक सोलंकी वंश का संस्थापक मूलराज प्रथम था। मूलराज प्रथम शैव धर्म का अनुयाई था। भीम प्रथम के शासनकाल में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया। भीम प्रथम के सामंत विमल ने आबू पर्वत पर दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर बनवाया। सोलंकी वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक जयसिंह सिद्धराज था। प्रसिद्ध जैन विद्वान हेमचंद, जयसिंह सिद्धराज के दरबार में था। माउंट आबू पर्वत (राजस्थान) पर एक मंडप बनाकर जयसिंह सिद्धराज ने अपने सातों पूर्वजों की गजारोही मूर्तियों की स्थापना की। मोढेरा के सूर्य मंदिर का निर्माण सोलंकी राजाओं के शासनकाल में हुआ। सिद्धपुर में रुद्र महाकाल के मंदिर का निर्माण जयसिंह सिद्धराज ने किया था। सोलंकी शासक कुमारपाल जैन-मतानुयाई था वह जैन धर्म के अंतिम राजकीय प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध है। सोलंकी वंश का अंतिम शासक भीम द्वितीय था। भीम द्वितीय के एक सामान्त लवण प्रसाद ने गुजरात में बघेल वंश की स्थापना की थी। बघेल वंश का कर्ण द्वितीय गुजरात का अंतिम हिंदू शासक था इसने अलाउद्दीन खिलजी की सेनाओं का मुकाबला किया था।

कलचुरी चेदि राजवंश

कलचुरी चेदि राजवंश कलचुरी वंश का संस्थापक कोक्कल था। इसकी राजधानी त्रिपुरी थी। कलचुरी वंश का एक शक्तिशाली शासक गांगेय देव था जिसने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की । पूर्व मध्यकाल में स्वर्ण सिक्कों के विलुप्त हो जाने के पश्चात उन्होंने सर्वप्रथम से प्रारंभ करवाया। कलचुरी वंश का सबसे महान शासक कर्ण देव था। कर्ण देव ने कलिंग पर विजय प्राप्त की और त्रिकालिंगाधिपति की उपाधि धारण की। प्रसिद्ध कवि राजशेखर कलचुरी दरबार में ही रहते थे।

सिसोदिया वंश

सिसोदिया वंश सिसोदिया वंश के शासक अपने को सूर्यवंशी कहते थे। सिसोदिया वंश के शासक मेवाड़ पर शासन करते थे मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ थी। अपनी विजयों के उपलक्ष्य में विजय स्तंभ का निर्माण राणा कुंभा ने चित्तौड़ में करवाया था। खतौली का युद्ध 1518 ईस्वी में राणा सांगा एवं इब्राहिम लोदी के बीच हुआ था।