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सोलंकी वंश अथवा गुजरात के चालुक्य शासक

सोलंकी वंश अथवा गुजरात के चालुक्य शासक
  1. सोलंकी वंश का संस्थापक मूलराज प्रथम था।
  2. मूलराज प्रथम शैव धर्म का अनुयाई था।
  3. भीम प्रथम के शासनकाल में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया।
  4. भीम प्रथम के सामंत विमल ने आबू पर्वत पर दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर बनवाया।
  5. सोलंकी वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक जयसिंह सिद्धराज था।
  6. प्रसिद्ध जैन विद्वान हेमचंद, जयसिंह सिद्धराज के दरबार में था।
  7. माउंट आबू पर्वत (राजस्थान) पर एक मंडप बनाकर जयसिंह सिद्धराज ने अपने सातों पूर्वजों की गजारोही मूर्तियों की स्थापना की।
  8. मोढेरा के सूर्य मंदिर का निर्माण सोलंकी राजाओं के शासनकाल में हुआ।
  9. सिद्धपुर में रुद्र महाकाल के मंदिर का निर्माण जयसिंह सिद्धराज ने किया था।
  10. सोलंकी शासक कुमारपाल जैन-मतानुयाई था वह जैन धर्म के अंतिम राजकीय प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध है।
  11. सोलंकी वंश का अंतिम शासक भीम द्वितीय था।
  12. भीम द्वितीय के एक सामान्त लवण प्रसाद ने गुजरात में बघेल वंश की स्थापना की थी।
  13. बघेल वंश का कर्ण द्वितीय गुजरात का अंतिम हिंदू शासक था इसने अलाउद्दीन खिलजी की सेनाओं का मुकाबला किया था।

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शक वंश

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कश्मीर के राजवंश

कश्मीर के राजवंश कश्मीर पर शासन करने वाले शासक वंश काल क्रम में इस प्रकार थे- कार्कोट वंश>उत्पल वंश>लोहार वंश। सातवीं शताब्दी में दुर्लभ वर्धन नामक व्यक्ति ने कश्मीर में कार्कोट वंश की स्थापना की थी। प्रतापपुर नगर की स्थापना दुर्लभक ने की थी। कार्कोट वंश का सबसे शक्तिशाली राजा ललितादत्य मुक्तापीड था। कश्मीर का मार्तंड मंदिर का निर्माण ललितादित्य के द्वारा करवाया गया था। कार्कोट वंश के बाद कश्मीर पर उत्पल वंश का शासन हुआ इस वंश का संस्थापक अवंति वर्मन था। अवंतीपुर नामक नगर की स्थापना अवंति वर्मन ने की थी। उत्पल वंश के बाद कश्मीर पर लोहार वंश का शासन हुआ। लोहार वंश का संस्थापक संग्राम राज था। लोहार वंश का शासक हर्ष- विद्वान, कवि तथा कई भाषाओं का ज्ञाता था। कल्हण हर्ष का आश्रित कवि था। जयसिंह, लोहार वंश का अंतिम शासक था जिसने 1128 ईस्वी से 1155 ईस्वी तक शासन किया। जय सिंह के शासन के साथ ही कल्हण की राजतरंगिणी का विवरण समाप्त हो जाता है। राजतरंगिणी - भारत की पहली इतिहास की पुस्तक है।