Skip to main content

Posts

बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतमबुद्ध थे। इन्हें एशिया का ज्योति पुंज लाइट ऑफ एशिया कहा जाता है। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में कपिलवस्तु के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता शुद्धोधन शाक्य के गण के मुखिया थे। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध के नाम से जाना गया वह स्थान बोधगया कहलया। बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ (ऋषिपटनम) में दिया जिससे बौद्ध ग्रंथों में धर्मचक्र प्रवर्तन कहा गया। बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पाली में दिए। इनके प्रमुख अनुयायी शासक थे बिंबसार, प्रसेनजीत जाति तथा उदयन। बुद्ध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था में कुशीनारा तात्कालिक देवरिया उत्तर प्रदेश में चुंद द्वारा अर्पित भोजन करने के बाद हो गई जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया है। बौद्ध धर्म के बारे में हमें विशेष ज्ञान पाली त्रिपिटक से प्राप्त होता है। बौद्ध धर्म मूलतः अनीश्वरवादी है इसमें आत्मा की परिकल्पना भी नहीं है। प्रथम बौद्ध संगीति 483 ईसा पूर्व राज्यगृह में महा कश्यप की अध्यक्षता में अजातशत्रु के शासनकाल में हुआ था। द्वितीय...

शैव धर्म

शैव धर्म भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव एवं शिव से संबंधित धर्म को शैव धर्म कहा गया है। शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है। ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्य पुराण में मिलता है। एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूटो ने करवाया था। चोल शासक राजराज प्रथम ने तंजौर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया जिसे बृहदीश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कुषाण शासको की मुद्राओं पर शिव एवं नंदी का एकसाथ अंकन प्राप्त होता है।

इस्लाम धर्म

इस्लाम धर्म इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद थे। हजरत मोहम्मद का जन्म 570 ई० में मक्का में हुआ था। हजरत मोहम्मद के पिता का नाम अब्दुल्ला और माता का नाम अमीना था। हजरत मोहम्मद को मक्का के पास हीरा नामक गुफा में ज्ञान की प्राप्ति हुई। पैगंबर के मक्का से मदीना की यात्रा इस्लाम जगत में मुस्लिम संवत के नाम से जाना जाता है। हजरत मोहम्मद की मृत्यु 632 ई० को हुई इन्हें मदीना में दफनाया गया। मोहम्मद की मृत्यु के बाद इस्लाम सुन्नी तथा शिया नामक दो पंथो में विभाजित हो गया। सुन्नी उन्हें कहते हैं जो सुन्ना में विश्वास करते हैं । सुन्ना पैगंबर मोहम्मद के कथनों तथा कार्यों का विवरण है। शिया अली की शिक्षाओं में विश्वास करते हैं तथा उन्हें मोहम्मद का न्याय सम्मत उत्तराधिकारी मानते हैं अली, मोहम्मद के दामाद थे। पैगंबर मोहम्मद के उत्तराधिकारी 'खलीफा' कहलाए। इस्लाम जगत में खलीफा पद 1924 ई० तक रहा 1924 ई० में उसे तुर्की के शासक मुस्तफा कमालपाशा ने समाप्त कर दिया। इब्ने इशाक में सर्वप्रथम पैगंबर साहब का जीवन चरित्र लिखा है। मोहम्मद पैगंबर के जन्मदिन पर ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पर्व मना...

ईसाई धर्म

ईसाई धर्म ईसाई धर्म के संस्थापक हैं - ईसा मसीह। ईसाई धर्म का प्रमुख ग्रंथ है - बाइबल। ईसा मसीह का जन्म जेरूसलम के निकट बेथलेहम नामक स्थान पर हुआ। ईसा मसीह के जन्म दिवस को क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। ईशा ने अपने जीवन के प्रथम 30 वर्ष एक बढ़ई के रूप में बदले हम के निकट नाजरेथ में बिताएं। ईसा मसीह के प्रथम दो शिष्य थे एंडयूज़ एवं पीटर। ईसा मसीह को सूली पर रोमन गवर्नर पोंटियस ने चढ़ाया।

मगध राज्य का उत्कर्ष

मगध राज्य का उत्कर्ष  सोलह महाजनपदों में मुख्य प्रतिद्वन्दिता मगध और अवन्ति के बीच में थी इनमें भी अन्तिम विजय मगध को मिली। क्योंकि उसके पास अनेक योग्य शासक (बिम्बिसार, अजातशत्रु आदि) थे। लोहे की खान भी मगध में थी हलाँकि अवन्ति के पास भी लोहे के भण्डार थे। मगध की प्रारम्भिक राजधानी राजगिरि या गिरिब्रज पाँच तरफ पहाडि़यों से घिरी थी बाद की राजधानी पाटिलपुत्र, गंगा, सोन एवं सरयू के तट पर स्थित थी इन सब कारणो से अन्ततः विजय मगध को मिली। मगध साम्राज्य का दो महान काव्य रामायण और महाभारत में उल्लेख किया गया है | मगध साम्राज्य का वंश बृहद्रथ वंश मगध साम्राज्य के उत्थान में सर्वप्रथम बृहद्रथ वंश का नाम आता है। चेदि के राजा वसु के पुत्र बृहद्रथ ने प्रागैतिहासिक काल में सर्वप्रथम मगध में अपना साम्राज्य स्थापित किया और बृहद्रथ वंश की नींव डाली। बृहद्रथ महाभारतकालीन कृष्ण का घोर शत्रु था। मगध का उत्थान इसी के शासनकाल से माना जाता है। बृहद्रथ का पुत्र जरासंध भी मगध का प्रतापी राजा था जो मल्लयुद्ध में भीम द्वारा मारा गया। इस वंश का अंतिम शासक रिपुंजय अथवा निपुंजय था, इसकी हत्या उसक...

विदेशी आक्रमण

विदेशी आक्रमण भारत पर प्रथम विदेशी आक्रमण ईरान के हखमनी वंश के शासकों ने किया था। हखमनी वंश का संस्थापक साइरस (559-529 ई-पू-) था। साइरस ने जैड्रोसिया के रेगिस्तानी मार्ग से होकर भारत पर आक्रमण करने का प्रयास किया जो असफल रहा। भारत पर आक्रमण करने में प्रथम सफलता साइरस के उत्तराधिकारी दारा प्रथम (दारायवहु) (522-486 ई-पू-) को प्राप्त हुई। दारा (डेरियस) ने 516 ई-पू- में पश्चिमोत्तर भारत के पंजाब, सिंधु नदी के तटवर्ती भूभाग एवं सिंध को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया। डेरियस का उत्तराधिकारी क्षयार्ष (जरक्सीज) ने यूनानियों के विरुद्ध संघर्ष में भारतीयों को अपनी फौज में शामिल किया। ईरानियों ने भारत में खरोष्ठी लिपि को लेखन में प्रचलित किया। पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत से ईरानी सिक्के प्राप्त हुए हैं। ईरानियों ने आरमाइक लिपि का प्रचार-प्रसार किया। ईरानी आक्रमण के पश्चात् भारत को यूनानी आक्रमणकारी सिकन्दर का सामना करना पड़ा। सिकन्दर मेसीडोनिया (मकदूनिया) के क्षत्रप फिलिप द्वितीय का पुत्र था। सिकन्दर के गुरू का नाम अरस्तु था। 326 ई-पू- में सिकंदर ने अपना भारत विजय अभियान प्रारंभ किय...

मगध साम्राज्य के मौर्य, सुंग , कण्व, एवं सातवाहन वंश

मौर्य साम्राज्य   चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य था। घनानंद को हराने में चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य की मदद की थी जो बाद में चंद्रगुप्त का प्रधानमंत्री बना। चाणक्य द्वारा लिखित पुस्तक है अर्थशास्त्र जिसका संबंध राजनीति से है, चाणक्य को कौटिल्य तथा विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। चंद्रगुप्त जैन धर्म का अनुयायी था। चंद्रगुप्त ने अपना अंतिम समय कर्नाटक के श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर बिताया। चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस निकेटर को हराया, जो कि सिकंदर का सेनापति था। मेगास्थनीज सलोकस निकेटर का राजदूत था जो चंद्रगुप्त के दरबार में रहता था। नंद वंश के विनाश करने में चंद्रगुप्त मौर्य ने कश्मीर के राजा पर्वतक से सहायता प्राप्त की थी।     बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी बिंदुसार हुआ जो 298 ईसवी पूर्व में मगध की राज गद्दी पर बैठा। अमित्रघात के नाम से बिंदुसार जाना जाता था जिसका अर्थ है शत्रु विनाशक। वायु पुराण में बिंदुसार को भद्रसार या वारिसार कहा गया है। बिंदुसार के शासन काल में तक्षशिला में हुए दो विद्रोहों का वर्णन है इस विद...