Skip to main content

वैदिक सभ्यता एवं सिंधु सभ्यता

वैदिक सभ्यता

  1. वैदिक काल का विभाजन दो भागों में किया जाता है-  ऋग्वैदिक काल जो कि 1500 से 1000 ईशा पूर्व और उत्तर वैदिक काल जो कि 1000 से 600 ईसा पूर्व में किया गया है।
  2. आर्य सर्वप्रथम पंजाब एवं अफगानिस्तान में बसे। आर्यों द्वारा निर्मित सभ्यता वैदिक सभ्यता कहलायी।
  3. आर्यों की भाषा संस्कृत थी।
  4. आर्यों का मुख्य पेय पदार्थ सोमरस था यह वनस्पति से बनाया जाता था।
  5. आर्यों का समाज पितृ प्रधान था।
  6. ऋग्वेद में उल्लेखित सभी नदियों में सरस्वती सबसे महत्वपूर्ण तथा पवित्र मानी जाती थी।
  7. उत्तर वैदिक काल में इंद्र के स्थान पर प्रजापति सार्वधिक प्रिय देवता हो गए थे।
  8. 'सत्यमेव जयते' मुंडकोपनिषद से लिया गया है। उपनिषद में यज्ञ की तुलना टूटी नाव से की गई है।
  9. गायत्री मंत्र सविता नामक देवता को संबोधित है, जिसका संबंध ऋग्वेद से है।
  10. उत्तर वैदिक काल में कौशांबी नगर में प्रथम बार पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया है।
  11. महाकाव्य दो है- महाभारत एवं रामायण।
  12. महाभारत का पुराना नाम जयसंहिता है। यह विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है।


सिंधु सभ्यता
  1. सिंधु सभ्यता की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने की।
  2. सिंधु सभ्यता को प्रागैतिहासिक अथवा काशी युग में रखा जा सकता है।
  3. सिंधु सभ्यता पश्चिम में सुतकागेंडोर जो बलूचिस्तान में है तक फैला था।
  4. पूरब में आलमगीरपुर जो तात्कालिक जिला मेरठ उत्तर प्रदेश तक फैला था।
  5. उत्तर में मांदा जिला अखनूर जम्मू कश्मीर तक फैला था।
  6. तथा पश्चिम में दायमाबाद तात्कालिक जिला अहमदनगर महाराष्ट्र तक फैला था।
  7. लोथल एवं सुतकोतदा सिंधु सभ्यता का बंदरगाह था।
  8. जुते हुए खेत तथा नक्काशीदार ईंटों के प्रयोग का साक्ष्य कालीबंगन से प्राप्त हुआ।
  9. अग्निकुंड लोथल और कालीबंगा से प्राप्त हुए हैं।
  10. सिंधु सभ्यता में मुख्य फसल थी गेहूं और जौं।
  11. रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं , जिनसे धान की खेती होने का प्रमाण मिलता है । चावल के प्रथम साक्ष्य लोथल से ही प्राप्त हुए हैं।
  12. आग में पकी हुई मिट्टी को टेराकोटा कहा जाता है।
  13. मोहनजोदड़ो की खोज सिंधु नदी के पास राखल दास बनर्जी ने 1922 में किया।
  14. हड़प्पा की खोज रावी नदी के पास दयाराम साहनी ने 1921 में किया।

Popular posts from this blog

शक वंश

शक वंश यूनानियों के बाद शक आए। शक मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे। शकों की 5 शाखाएं थी और हर शाखा की राजधानी भारत और अफगानिस्तान में अलग-अलग भागों में थी। पहली शाखा ने अफगानिस्तान, दूसरी शाखा ने पंजाब (राजधानी तक्षशिला ) , तीसरी शाखा ने मथुरा, चौथी शाखा ने पश्चिम भारत एवं पांचवी शाखा के उपरी दक्कन पर प्रभुत्व स्थापित किया। चारागाह की खोज में सब भारत आए। 58 ईसापूर्व में उज्जैन के विक्रमादित्य द्वितीय ने शकों को पराजित कर के बाहर खदेड़ दिया और विक्रमादित्य की उपाधि धारण की। शकों की अन्य शाखाओं की तुलना में दक्षिण भारत में प्रभुत्व स्थापित करने वाली शाखा ने सबसे लंबे अरसे तक शासन किया। शकों का सबसे प्रतापी शासक रुद्रदामन प्रथम था जिसका शासन गुजरात के बड़े भूभाग पर था। रुद्रदामन प्रथम ने काठियावाड़ की अर्धशुष्क सुदर्शन झील (मौर्य द्वारा निर्मित) का जीर्णोद्धार किया। भारत में शक राजा अपने को छत्रप कहते थे।

विदेशी यात्रियों से मिलने वाली प्रमुख जानकारी

क) यूनानी- रोमन लेखक टेसियस- यह ईरान का राजवैध था। हेरोडोटस- इसे इतिहास का पिता कहा जाता है। इस ने अपनी पुस्तक हिस्टोरिका में पांचवी शताब्दी ईसापूर्व के भारत-फारस के संबंध का वर्णन किया है। सिकंदर के साथ आने वाले लेखक- आनेसिक्रटस, निर्याकस, तथा आसि्टोबुलस। मेगास्थनीज- यह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था, जो चंद्रगुप्त मौर्य के राज दरबार में आया था। इस ने अपनी पुस्तक इंडिका में मौर्य युगीन समाज एवं संस्कृति के विषय में लिखा है। डायमेकस- यह सीरियन नरेश आंटियोकस का का राजदूत था, जो बिंदुसार के राजदरबार में आया था। इसका विवरण भी मौर्य युग से संबंधित है। डायोनिसियस- यह मिश्र नरेश टालिमी फिलाडेल्फस का राजदूत था, जो अशोक के राज दरबार में आया था। टालमी- इसमें दूसरी शताब्दी में भारत का भूगोल नामक पुस्तक लिखी। प्लिनी- किसने प्रथम शताब्दी में 'नेचुरल हिस्ट्री' नामक पुस्तक लिखी। ख) चीनी लेखक फाहियान-  यह चंद्रगुप्तत द्वितीय केे दरबार मैं आया था। संयुगन- इसने अपने 3 वर्षों की यात्रा में बौद्ध धर्म की प्राप्तियां एकत्रित किया। हुएनसांग- या हर्षवर्धन के शासनकाल में आया था। ...

धर्म ग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलनेवाली महत्वपूर्ण जानकारियां

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत- प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी मुख्यता 4 स्रोतों से प्राप्त होती है- 1. धर्म ग्रंथ 2.  ऐतिहासिक ग्रंथ 3. विदेशियों का विवरण 4. पुरातत्व संबंधी साक्ष्य धर्म ग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलनेवाली महत्वपूर्ण जानकारियां- भारत का सर्व प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद है जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्ण  द्वैपायन वेदव्यास है। सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद एवं सबसे बाद का वेद अथर्ववेद है। ऋग्वेद में मंडलों की संख्या 10 है देवता सोम का उल्लेख ऋग्वेद के 9 वें मंडल में है। ऋग्वेद में शुक्र एवं श्लोकों की संख्या क्रमशा 1028 एवं 10462 है। वेद के श्लोकों को रचनाएं कहा जाता है। गद्य एवं पद्य वाला वेद यजुर्वेद है। भारतीय संगीत का जनक सामवेद। रोग निवारण, तंत्र मंत्र, जादू टोना, शाप, वशीकरण, विवाह, प्रेम, राजकर्म, मातृभूमि आदि विविध विषयों से संबंधित वेद है- अथर्ववेद। भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का सबसे अच्छा विवरण मिलता है- पुराणों में। पुराणों की संख्या 18 है। सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित पुराण है- मत्स्यपुराण। मौर्य वंश से संबंधित पुराण है- विष्ण...